परिचय
उत्तराखंड की सुरम्य वादियों में स्थित त्रियुगीनारायण मंदिर एक पवित्र स्थान है, जो भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। यह मंदिर न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि आज के समय में एक लोकप्रिय विवाह स्थल के रूप में भी उभर रहा है।
हिमालय की गोद में बसा यह मंदिर प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक आस्था का अनूठा संगम है। यहां विवाह संपन्न कराने से दंपति को शिव और पार्वती का आशीर्वाद मिलता है और उनके दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। आइए जानते हैं इस मंदिर की पौराणिक कथा, विवाह आयोजन की संपूर्ण व्यवस्था और इसके धार्मिक महत्व के बारे में-
त्रियुगीनारायण मंदिर का पौराणिक महत्व
त्रियुगीनारायण मंदिर का उल्लेख हिंदू धर्मग्रंथों में मिलता है। मान्यता है कि यहीं पर भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था। इस विवाह के साक्षी स्वयं भगवान विष्णु थे, जिन्होंने पार्वती जी के भाई का दायित्व निभाया। भगवान ब्रह्मा ने इस विवाह का विधिवत संचालन किया।
मंदिर के प्रांगण में एक पवित्र अग्नि कुंड स्थित है, जिसे अक्षय अग्नि कहा जाता है। कहा जाता है कि यह अग्नि त्रेता युग से निरंतर प्रज्वलित है और यह वही अग्नि है जिसके समक्ष भगवान शिव और माता पार्वती ने सात फेरे लिए थे। आज भी इस अग्नि से विवाह संपन्न किए जाते हैं।
त्रियुगीनारायण मंदिर में विवाह आयोजन की व्यवस्था
विवाह के लिए त्रियुगीनारायण मंदिर एक आदर्श स्थान है। यहां शादी का आयोजन पारंपरिक हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार किया जाता है। आइए जानते हैं विवाह आयोजन से जुड़ी प्रमुख व्यवस्थाओं के बारे में:
1. विवाह की अनुमति और बुकिंग प्रक्रिया
त्रियुगीनारायण मंदिर में विवाह करने के लिए उत्तराखंड सरकार और स्थानीय मंदिर प्रशासन से अनुमति लेनी होती है। विवाह के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन बुकिंग की सुविधा उपलब्ध है।
2. विवाह के लिए आवश्यक दस्तावेज
- वर-वधू के आधार कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र
- विवाह पंजीकरण हेतु आवश्यक प्रमाण पत्र
- स्थानीय प्रशासन से अनुमति पत्र
- विवाह कराने वाले पुरोहित की नियुक्ति
3. विवाह अनुष्ठान और रस्में
- मंडप सजावट: मंदिर परिसर में एक पारंपरिक मंडप सजाया जाता है।
- पवित्र अग्नि का उपयोग: त्रियुगीनारायण मंदिर की अक्षय अग्नि के समक्ष विवाह संपन्न होता है।
- पारंपरिक संगीत और वैदिक मंत्रोच्चारण: विद्वान पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया जाता है।
4. आवास और खानपान की व्यवस्था
विवाह आयोजन के लिए स्थानीय धर्मशालाओं और होटलों में ठहरने की उचित व्यवस्था की जाती है। साथ ही, शुद्ध शाकाहारी भोजन की व्यवस्था की जाती है।
5. फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी
विवाह समारोह को यादगार बनाने के लिए प्रोफेशनल फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
6. यातायात और परिवहन सुविधा
त्रियुगीनारायण मंदिर तक पहुंचने के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश और निकटतम हवाई अड्डा देहरादून स्थित जॉली ग्रांट एयरपोर्ट है। यहां से सड़क मार्ग द्वारा मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।
त्रियुगीनारायण विवाह के लाभ और महत्व
- इस मंदिर में विवाह करने से नवविवाहित जोड़े को शिव-पार्वती का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।
- विवाह जीवन में स्थिरता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
- आध्यात्मिक वातावरण और हिमालय की सुंदरता विवाह को और अधिक भव्य बनाती है।
निष्कर्ष
त्रियुगीनारायण मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि एक अनूठा विवाह स्थल भी है। यहाँ विवाह करना शिव और पार्वती के पावन मिलन की साक्षी बनना है। यदि आप अपने विवाह को विशेष, दिव्य और अविस्मरणीय बनाना चाहते हैं, तो त्रियुगीनारायण मंदिर एक उत्तम विकल्प है।