
1982 में आई राजश्री प्रोडक्शंस की सुपरहिट फिल्म ‘नदिया के पार’ ने हिंदी सिनेमा को एक ऐसा गीत दिया, जो आज भी 80 के दशक के सबसे खूबसूरत और यादगार रोमांटिक गानों में शुमार है। ‘कौन दिसा में लेके चला रे बटोहिया’ सिर्फ एक फिल्मी गीत नहीं था, बल्कि गांव की मिट्टी, लोक-संस्कृति और मासूम प्रेम की भावनाओं का सजीव चित्रण था। इस गाने में न तो चमक-दमक थी और न ही दिखावटी रोमांस, बल्कि रिश्तों की मर्यादा में बंधा एक अनकहा प्यार बेहद सादगी से उभरकर सामने आया।
फिल्म की कहानी में गुंजा का किरदार अपनी ही बहन के देवर के प्रति धीरे-धीरे आकर्षण महसूस करता है। यह प्रेम खुलकर व्यक्त नहीं होता, बल्कि नजरों, मुस्कान और गीत के बोलों में छिपा रहता है। यही संकोच और भावनात्मक गहराई इस गीत को खास बनाती है। हेमलता और जसपाल सिंह की मधुर आवाज़ ने इस मासूम प्रेम को और भी असरदार बना दिया, जबकि सचिन और साधना सिंह की सादगी भरी अदाकारी ने इसे यादगार बना दिया।
‘नदिया के पार’ की सफलता का बड़ा कारण यह था कि फिल्म और उसके गीतों ने पारिवारिक मूल्यों, रिश्तों की गरिमा और भारतीय संस्कारों को बिना किसी बनावट के दर्शाया। यही वजह है कि यह गीत दशकों बाद भी लोगों के दिलों में बसा हुआ है।
इस गीत की लोकप्रियता इतनी गहरी रही कि करीब 12 साल बाद उसी भावनात्मक एहसास को नए अंदाज में दोबारा पेश किया गया। 1994 में रिलीज हुई ‘हम आपके हैं कौन’ का गीत ‘ये मौसम का जादू है मितवा’ उसी शर्मीले, पवित्र प्रेम की भावना को आगे बढ़ाता नजर आया। इस तरह ‘नदिया के पार’ का यह गीत भारतीय सिनेमा में शुद्ध रोमांस और लोक-संवेदनाओं की एक एवरग्रीन पहचान बन गया।